Thursday, 8 October 2020

Sanskrit mantras

 

🌹प्रातः स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम्।

दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम्।🌹

🌹भावार्थ:- शरत्कालीन चन्द्रमा के समान उज्ज्वल आभा वाली, उत्तम रत्नों से जटित मकरकुण्डलों तथा हारों से सुशोभित, दिव्यायुधोंसे दीप्त सुन्दर नीले हजारों हाथों वाली, लाल कमल की आभा युक्त चरणों वाली भगवती दुर्गा देवी का मैं प्रातःकाल स्मरण करता हूँ। 🌹

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Sanskrit mantras

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