Monday, 19 October 2020

Sanskrit mantras

 


🌹सिंहस्था शशिशेखरा मरकतप्रख्यैश्चतुर्भिर्भुजैः शङ्खं चक्रधनुःशराश्च दधती नेत्रैस्त्रिभिः शोभिता। आमुक्ताङ्गदहारकङ्कणरणत्काञ्चीरणन्नूपुरा दुर्गा दुर्गतिहारिणी भवतु नो रत्नोल्लसत्कुण्डला। 🌹

भावार्थ:- जो सिंह की पीठपर विराजमान हैं,जिनके मस्तकपर चन्द्रमाका मुकुट है, जो मरकतमणिके समान कान्तिवाली अपनी चार भुजाओं में शङ्खं,चक्र, धनुष और बाण धारण करती हैं, तीन नेत्रों से सुशोभित होती हैं, जिनके भिन्न-भिन्न अंग बांधे हुए बाजूबंद, हार,कंकण,खनखनाती हुई करधनी और रूनझुन करते हुए नूपुरोंसे विभूषित हैं तथा जिनके कानों में रत्नजटित कुण्डल झिलमिलाते रहते हैं, वे भगवती दुर्गा हमारी दुर्गति दूर करनी वाली हों।🌹

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Sanskrit mantras

  🌹 ॐ खड्गं चक्र-गदेषु-चाप-परिघाञ्छूलं भुशुण्डीं शिरः शङ्खं संदधतीं करैस्त्रिनयनां सरवाङ्गभूषावृताम्। नीलाश्म-द्युतिमास्य-पाददशकां सेवेमहा...