🌷शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।🌷🌹🌹
🌷भावार्थ:-शान्त आकृति वाले,शेषनाग के ऊपर सोने वाले, नाभि में कमल धारण करने वाले, देवताओं के देवता, जगत के आधार, आकाश के समान, बादलों के समान रंग वाले,सुन्दर अंग वाले, लक्ष्मी जी के स्वामी, कमल जैसे नेत्रवाले, ध्यान द्वारा योगियों को प्राप्त होने वाले, संसार के भयों को हरनेवाले और सभी लोकों के एकमात्र स्वामी विष्णु भगवान को मैं नमस्कार करता हूँ। 🌷🌹🌹

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